Sapno ki aur
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| Sapno ki aur |
रास्ते पे चलो तुम, चाहे कांटे हों या धूल,
सपनों की ओर बढ़ो, मत बनाओ कोई भूल।
रात काली हो चाहे, आँधियाँ चलें हजार,
हर एक कदम पे रखो, मेहनत का हथियार।
रुकावटें होंगी लाख, ये तो दुनिया की रीत,
परिश्रम का दीप जलाओ, तभी होगा सब ठीक।
पसीने से सींचो सपने, धैर्य से लो संकल्प,
कामयाबी का सूरज, चढ़ेगा फिर अनंत।
हार मान लेना नहीं, यह है सिर्फ एक पल,
आने वाला कल होगा, मेहनत का उज्जवल।
सपनों को पाने के लिए, खुद से करना प्यार,
कठिन परिश्रम से ही, मिलेगा संसार।
झुको नहीं, रुको नहीं, तुम बनाओ अपनी राह,
सपनों की मंज़िल पर, होगी तुम्हारी जीत की चाह।

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