Mere Nazdeek To Aa Jra
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मेरे नजदीक तो आ जरा,
तुझे महसूस करना चाहती हूं|
अपनी बहू को फैला जरा,
तेरी बाहों में सिमटना चाहती हूं|
आज तेरी आंखों से मुझे,
अपने आप को देखना है|
चल मेरे साथ इस चांदनी रात में,
इसे आज मैं जीतना चाहती हूं|
आ मेरे साथ सुबह में बैठकर,
इन चिड़ियों की आवाज तो सुन|
इस मीठे रस को हम दोनों के,
जीवन में घोलने चाहती हूं|
आ मेरे पास बैठ,
तुझे पढ़ना चाहती हूं|
आप मेरे साथ कुछ खेल तो खेल,
अपने आप को तुझे हारना चाहती हूं|
बन जा आज मेरे शब्द तू,
मैं इस दुनिया से कुछ कहना चाहती हूं|
तू है जिसे मैंने प्यार किया,
तेरी चाहत बनकर तेरे दिल में रहना चाहती हूं|

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